
रांची। क्रिकेट फैंस के दिमाग में अभी भी वह दृश्य ताजा है जब भारतीय विकेटकीपर महेंद्रसिंह धोनी ऐसा दर्शाते थे कि उन्होंने गेंद कलेक्ट कर ली है और वे थ्रो करने वाले हैं। वास्तव में उस वक्त गेंद उनके हाथ में होती ही नहीं थी, लेकिन वे अपने इस एक्शन से बल्लेबाजों को भ्रमित कर रन लेने से रोक देते थे।
कुछ समय पहले तक क्रिकेट में इस तरह के एक्शन को जायज माना जाता था, लेकिन आईसीसी के नियमों में बदलाव के बाद इस तरह की हरकत पर दंड का प्रावधान है। आईसीसी के फेक फील्डिंग नियम 41।5 के नियम के तहत यदि कोई फील्डर अपने शब्दों और एक्शन से जानबूझकर बल्लेबाजों का ध्यान भटकाने की कोशिश करते हुए पाया गया या उसने फेक फील्डिंग के जरिए धोखा देने की कोशिश की तो अंपायर बल्लेबाजी करने वाली टीम को 5 पेनल्टी रन प्रदान करेगा। इसलिए अब यदि धोनी ने किसी मैच में ऐसा किया तो उन्हें सजा मिलेगी और इसके फलस्वरूप विपक्षी टीम को पेनल्टी के रूप में 5 रन मिलेंगे।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर और कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने भी आईसीसी के इस फेक फील्डिंग नियम की आलोचना करते हुए आईसीसी से इस पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
फेक फील्डिंग नियम का पहला शिकार क्वींसलैंड के फील्डर मार्नस लैबूसचेंज बने, जब उन्हें ऑस्ट्रेलिया के घरेलू टूर्नामेंट जेएलटी वनडे कप में बल्लेबाज को भ्रमित करने के लिए फेक फील्डिंग नियम के तहत दंडित किया गया था।