जागरूकता रहें ‘एकरूपता‘…!

asiakhabar.com | March 28, 2025 | 4:51 pm IST

संजय एम तराणेकर
ये देखों छोटी-सी बात हैं जागरूकता,
मामूली-सी है लगती न कोई रूकता।
आदमी दुनिया में हैं सबसे मतिमान,
उसी के हाथों हैं बहुत कुछ गतिमान।
मानसिक शक्ति ही दे सकती है मति,
जहॉ बुद्धिमत्ता विराजती है सरस्वती।
ये देखों छोटी-सी बात हैं जागरूकता,
मामूली-सी है लगती न कोई रूकता।
सभी सांसारिक ‘व्याप‘ में उलझ रहें,
अपना दुःख, तकलीफ किसको कहें।
कहॉ बैठाएं सामंजस्य और ये शक्ति,
संसार में स्वयं को भी होती विरक्ति।
ये देखों छोटी-सी बात हैं जागरूकता,
मामूली-सी है लगती न कोई रूकता।
कुछ पाने का लोभ, अतिरिक्त प्यास,
जब जीवन में न मिले संतुष्टि खास।
चाहे करों नौकरी ना रहो तुम ‘उदास‘,
एक ही इल्तजा ना बनो उनके ‘दास‘।
बस यहीं जागरूकता रहें ‘एकरूपता‘!


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