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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन के साथ शुक्रवार को बातचीत की, जिसमें भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) रणनीतिक साझेदारी को नई गति प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
ऐसी संभावना है कि दोनों पक्षों ने एक महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते को मजबूत करने के लिए जारी वार्ता का जायजा लेने के साथ-साथ व्यापार एवं निवेश संबंधों को मजबूत करने के तरीके तलाशे।
लेयेन ‘ईयू कॉलेज ऑफ कमिश्नर्स’ यानी समूह के 27 सदस्य देशों के वरिष्ठ राजनीतिक नेताओं के साथ दो दिवसीय भारत यात्रा के तहत बृहस्पतिवार को यहां पहुंचीं।
मोदी के साथ वार्ता से पहले लेयेन ने एक ‘थिंक टैंक’ को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह दुनिया खतरों से भरी हुई है लेकिन मेरा मानना है कि शक्तियों के बीच महाप्रतिस्पर्धा का यह आधुनिक संस्करण यूरोप और भारत के लिए अपनी साझेदारी को फिर से परिभाषित करने का एक अवसर है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यूरोपीय संघ और भारत इस चुनौती का एक साथ मिलकर सामना करने के लिए कई मायनों में अनूठी स्थिति में हैं।’’
दोनों पक्षों के बीच रूस-यूक्रेन संघर्ष, हिंद-प्रशांत क्षेत्र की स्थिति और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। मोदी और वॉन डेर लेयेन की वार्ता के बाद एक संयुक्त बयान जारी किए जाने की संभावना है।
यूरोपीय संघ भारत के साथ अपने व्यापार क्षेत्र का विस्तार करने का इच्छुक है और दोनों पक्षों का मानना है कि प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते से आर्थिक साझेदारी में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
यूरोपीय संघ के साथ वस्तुओं में भारत का द्विपक्षीय व्यापार वित्त वर्ष 2023-24 में 135 अरब अमेरिकी डॉलर था। इस दौरान यूरोपीय संघ को 76 अरब अमेरिका डॉलर का निर्यात किया गया और यूरोपीय संघ से 59 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात किया गया। इसी के साथ ईयू वस्तुओं के व्यापार में भारत का सबसे बड़ा साझेदार बन गया।
सेवाओं में 2003 में द्विपक्षीय व्यापार 53 अरब अमेरिकी डॉलर था, जिसमें 30 अरब अमेरिकी डॉलर का भारतीय निर्यात और 23 अरब अमेरिकी डॉलर का आयात शामिल था। यह सेवाओं के क्षेत्र में अब तक का सबसे अधिक व्यापार है।
भारत में यूरोपीय संघ के निवेश का मूल्य 117 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है तथा भारत में लगभग 6,000 यूरोपीय कंपनियां मौजूद हैं। यूरोपीय संघ में भारत का निवेश लगभग 40 अरब अमेरिकी डॉलर है।